पड़ोसी के हक इन इस्लाम सुन्नते और आदाब इन उर्दू

पड़ोसी के हक इन इस्लाम सुन्नते और आदाब इन उर्दू

पड़ोसी के हक  इन इस्लाम सुन्नते और आदाब इन उर्दू Padosi ka haq in isla पड़ो m sunate our adab in urdu

हजरत इब्ने उम्र और हजरत ए आयशा रसी अल्लाह ताला अन्हा सेम आरवी है कि सरकारी मदीना सल्ला वसल्लम ने फरमाया
“हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम मुझे पड़ोसी के बारे में वसीयत करते रहे यहां तक कि मुझे ओमान होने लगा कि वह पड़ोसी को विरासत का हकदार बना देंगे !
” और  अल्लाह की बंदगी करो और उसका शरीर किसी को ना ठराव और मां बाप से भलाई करो और रिश्तेदारों और यतीमो और मोहताज और पास के हमसाए और दूर के हमसाए और करवट के साथी और राहगीर और अपने बांधी  गुलाम से”! 
 
(कंजुल इमान न)

पड़ोसियों को इजा देने वाला जहन्नामी है

हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अन्हा से रिवायत है कि एक शख्स ने अर्ज किया रसूलल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम फुलानी औरत नमाज रोजा सदका कसरत से करती है मगर बात यह भी है कि वह अपने पड़ोसियों को जवान से तकलीफ भी पहुंचाती है सरकारी मदीना सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम ने फरमाया वह जहन्नम में है उस शख्स ने फिर अर्थ की या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम पुरानी औरत के रोजा नमाज हो सदका यानी नवो फिल्म में कमी है वह पनीर के टुकड़े सदका करती है और अपनी जुबान से पड़ोसियों को ऐसा नहीं देती आकाश दो जहां सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम ने फरमाया वह औरत जन्नत में है।
प्यारे प्यारे आका हजरत मोहम्मद सल्ला वाले वसल्लम का फरमाने अली शान है
 
” वह शक्स जन्नत में दाखिल नहीं होगा जिसकी शरारत उसे उसका पड़ोसी महफूज नहीं!
( मुस्लिम )
फखि   अब उल्लास नकल करते हैं की हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम ने फरमाया जो शख्स मौत हो जाए और उसके तीन हमसाय हो और वह सब के सब उससे राजी हो तो उस शख्स की मगफिरत हो जाएगी!
( तबी हुलगा फीलिंन)
हजरत अब्दुल्ला बिन मसूद रजा अल्लाह तला अन्हू से मार वी है कि एक शख्स ने  मदनी आका सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम की खिदमत में आरज की या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम मुझे यह कैसे मालूम हो कि मैंने अच्छा किया या बुरा किया सरकारे मदीना से सल्ला वसल्लम  फरमाया जब तुम अपने पड़ोसियों को यह कहते हुए तुमने अच्छा किया तो तुम बेशक तुमने अच्छा किया और जब यह कहते सुनो कि तुमने बुरा किया तो बेशक तुम ने बुरा किया।
(इब्ने माजा)
अब्दुल रहमान बिन अभी करार रद्द हुआ हु ताला अनु से मार दी है कि एक रोल सरकारे मदीना सब अल्लाह ताला अलेही वसल्लम ने हुजूर किया सहाबा इकराम रज़ी अल्लाह ताला अनु का पानी लेकर मुंह वगैरह परमल करना शुरू कर दिया अल्लाह और रसूल अल्लाह और रसूल और उसके पास आ जाए तो उसके पड़ोस में हो उसके साथ एहसान करें ।
(शूउबुल ईमान)
हजरत अब्दुल्ला बिन अब्बास रजि अल्लाह ताला अनु से रिवायत है कि मैंने जोर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम को यह फरमाते सुना मोमिन वह नहीं जो खुद पेट भर कर खाए और उसका पड़ोसी उसके पहलू में बुखार है यानी मोमिन का मिल नहीं ।
(शूउबुल ईमान)
 
क्या हम भी ऐसा कर सकते हैं अपने हमसाय के लिए
किसी बुजुर्ग रहमतुल्लाह ताला अनु के घर में चूहों की कसरत थी किसी ने मशवरा किया कि आप रद्द रहमतुल्लाह ताला अन्हू एक बिल्ली रख ले और बुजुर्ग ने जवाब में कहा मुझे इस बात का अंदेशा है कि चूहे बिल्ली की आवाज सुनकर हो जुदा होकर भागकर हम सबके घरों में घुस जाएंगे तो गोवा में ऐसा आदमी बन जाऊंगा जो खुद तो एक तकलीफ को पसंद नहीं करता मगर दूसरों को वही दुख पहुंचाना चाहता है
(मुक़ाशीफतुल कुलुव )
शोरबा ज्यादा बनाओ
हजरत अबू गिफा री रजि अल्लाह ताला अन्हू से मालवीय है की सरकारे मदीना सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने फरमाया अबूजर जब तुम शोरबा पकाओ तो उसमें पानी ज्यादा डाला करो और अपने पड़ोसियों का ख्याल रखा करो मुस्लिम हजरत यूसुफ अली रज़ी अल्लाह ताला अनु से मारी है कि मदर मदनी आका सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम ने तीन बातों की वसीयत फरमाई।
1 अमीर की याद करो अगर चेक कोई नकता गुलाम अमीर बना दिया जाए।
2 जब कभी शोरबा बनाओ तो पानी फूट डाल लिया करो फिर अपने आसपास के हालत मंद हमसाया को पहुंचाओ।
3 और नमाज उसके मूसातहब वक्त में पढ़ लिया करो।
उम्मुल  मोमिनीन हजरत आयशा सिद्दीका रजि अल्लाह ताला अनु सेमारी है आप फर्मआती हैं कि मैंने हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम शेयर्स की या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम मेरे दो पड़ोसी हैं मैं इनमें से किस को हदिया भेजा करो आका सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया जिसका दरवाजा तुम्हारे दरवाजे से नजदीक है !
(बुखारी)
 
हजरत अब्दुल्ला बिन उमर रजि अल्लाह ताला अनु से रिवायत है कि मदनी ताजदार सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम ने फरमाया तुम्हें मालूम है कि पड़ोसी के क्या हक है ,फिर फरमाया।
 
9- अपनी हांडी से उसको इज़ न दो
 
10- मैं भी खरीदो तो उसके पास भी हदिया करो तोहफा अगर तो फोन ना करना हो तो छुपा कर मकान में लाओ और तुम्हारे बच्चे उसे लेकर बाहर ना निकले कि पड़ोसी के बच्चों को रंज होगा तुम्हें मालूम है कि पड़ोसी का क्या हक है कसम है उसकी जिसके कब्जे में मेरी जान है पूरे तौर पर पड़ोसी का हक अदा करने वाले थोड़े हैं यह वही है जिन पर अल्लाह की मेहरबानी है फिर ताजदार ए मदीना सलाम ताना अलेह वसल्लम ने फरमाया कि पड़ोसी 3 किस्म के हैं बास के तीन हक है बास के दो और बास का एक।
 
1-जो पड़ोसी मुसलमान होने के साथ-साथ रिश्तेदार भी हैं उनके 3 हक है पहला हक हक के पड़ोस दूसरा हक हक के सलाम तीसरा हक हक के करावत यानी रिश्तेदारी।
 
2- मुसलमान पड़ोस के दोहे हैं पहला हक के पड़ोस दूसरा हक के सलाम
 
3- और काफी पड़ोसी का सिर्फ एक हक है और वह है हक के पड़ोस।
 
हमने अर्थ की या रसूलल्लाह सल्लल्लाहो वाले वसल्लम उनको अपनी कुर्बानी ओं में से आंखों से लल्ला वाले सल्लम ने फरमाया मुशरिकीन को कुर्बानी में से कुछ ना दो हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनु से मार दी है कि ताजदार ए मदीना सलाम ताला वसल्लम ने इरशाद फरमाया कोई पड़ोसी अपने पड़ोस के दीवार में लकड़ी काटने से मना न करें इसके बाद हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनु ने फरमाया है मैं तुम्हें देखता हूं कि तुम इस सुन्नत से एतराज एतराज कर रहे हो खुदा की कसम मैं तुम्हारे दरमियान इसे राइस करके रहूंगा
(बुखारी मुस्लिम )
पड़ोसी अगर हमारी दीवार में हुक बगैरा गाना चाहे तो खुशी इजाजत देनी चाहिए!

पड़ोसी से मोहब्बत बढ़ाने का आसान तरीका

हजरत आयशा सिद्दीका रजि अल्लाह ताला अन्हा से मालवीय है कि सरकारी दो जहां सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया आइशा पड़ोसी का बच्चा आ जाए तो उसके हाथ में कुछ ना कुछ तो किस से मोहब्बत बढ़ेगी।
(देलमी )
Mafia Bin Abdul Harsh Radi Allahu Tala anhu Sherawat ki Sarkar E Madina Sallallahu alayhi Wasallam Ne farmaya Musalman Ke Liye Duniya Mein Yeh Baat mein se hai ki uska Padosi Ne ko aur Makaan khush raho aur Savari achi Ho ।
(Hakeem)
 फरमाने ताजदार ए मदीना सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है कि औरत और घोड़े में बरकत भी है और नहीं सब भी है औरत की बरकत थोड़ा मैहर आसान निकाह और अच्छे अखलाक वाली होना है उसकी नुसरत भारी महल मुश्किलें निकाह और बदक लार्की है घर की बरकत उसका खुला होना और उसके हम सायों का अच्छा होना है उसके अनुसार उसका तंग होना और उसकी हमसा योगा बुरा होना है घोड़े की बरकत उसकी फरमा बरदारी और अच्छी आदतें हैं और उसकी नौशाद उसकी बुरी आदतें और सोमवार ना होने देना है ।
(मुकाशिफअतुल कुलुव)

हम साए यानी पड़ोसी की तारीफ

जोहरी रहमतुल्ला हे ताला अनु निर्वाह किया है कि एक शख्स ने सरकारी मदीना सल्लल्लाहो ताला अलेही वाले वसल्लम किस्मत में हम साए की शिकायत की मदनी आका सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने हुक्म फरमाया की मस्जिद के दरवाजे पर खड़े होकर ऐलान कर दो कि साथ के 40 गए हम शायरी में दाखिल हैं जोड़ी ने कहा 40 इधर 40 उधर 40 इधर और 40 उधर और चारों संतों की तरफ इशारा किया ।
(मूकशिफल कुलुव)
हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनु ई है कि सरकारे मदीना अल्लाह का फरमान है औरत के दिन पर ईमान रखता है उसे चाहिए कि अपने पड़ोसी को तकलीफ ना दे और जो उसे चाहिए कि मुसलमान की इज्जत करें और जो अल्लाह ताला और आखिरत के दिन पर ईमान रखता है उसे चाहिए कि अच्छी बात कहें या खामोश रहे ।
(बुखारी व मुस्लिम)
हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनु से मार भी है कि सरकार ए मदीना सलाम ताला अलेही वसल्लम ने फरमाया मुसलमान और तो कोई पड़ोसन किसी पड़ोसन के लिए किसी चीज को हकीर ना समझे वह बकरी का खुर ही क्यों ना हो ।
(बुखारी व मुस्लिम)
हम शायद का हक सिर्फ यह नहीं कि आप उससे उसकी तकलीफ है दूर करें बल्कि ऐसी चीजें भी उससे दूर करनी चाहिए कि जिनसे उसे दुख पहुंचने का इस्तेमाल हो हम साए से दुख दूर करना उसे दुख देने वाली चीजों से दूर रखने के अलावा कुछ और भी हुकूक है उससे नरमी और हुस्ने सुलूक से पेश आएं उससे नेकी और भलाई करता रहे इसीलिए फरमाया गया है कि की आमद के दिन फकीर हमसाया अमीर हमसाए को पकड़कर अल्लाह ताला से कहेगा अल्लाह से पूछ इसने अपने सदक आप मुझसे क्यों रोके थे और अपना दरवाजा मुझ पर क्यों बंद किया था
प्यारे भाइयों अगर अल्लाह ने आपको साहिबे हैसियत बनाया है तो अपने गरीब और नादान पड़ोसियों को हकी समझने सुधारने के बजाय उनकी उनकी महक दूर माली याद भी करते रहे उन्हें देते रहे जितना हो सके अपने पड़ोसियों को अता करें।
हिकायत 
 
हजरत इबनुल मुक़्फफा रजि अल्लाह ताला अन्हा
से किसी ने कहा कि तुम्हारा हमसाया सवारी के कर्ज की वजह से अपना घर बेच रहा है तो आप रहमतुल्लाह ताला अन्हू उस शख्स की दीवार के साए में बैठते थे उन्होंने यह सुनकर फरमाया कि अगर उसने तंग दस्ती की वजह से अपना घर भेज दिया तो गया मैंने उसकी दीवार के साए की कदर नहीं की चुना चे उसके पास रकम भेजी और कहला भेजा घर को ना बेचो।
 (मुकाशिफतुल कुलुब)
 

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