अस्सलामुअलैकुम इन हिंदी सलाम की अहमियत और उसके आदाब Assalamu Alaikum ||meaning ||in English

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अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी
अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी

अस्सलामु-अलैकुम -इन -हिंदी- सलाम की अहमियत और उसके आदाब Assalamu Alaikum ||meaning ||in English

 

अस्सलामु-अलैकुम -इन -हिंदी- सलाम की अहमियत और उसके आदाब Assalamu Alaikum ||meaning ||in English,अस्सलामुअलैकुम का मतलब ,अस्सलाम वालेकुम का जवाब यह सभी चीजें आपको इस पोस्ट में इंशाल्लाह मिल जाएंगे.

 

अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी सलाम की अहमियत और उसके आदाब Assalamu Alaikum ||meaning ||in English

 

अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी
अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी

 

اللهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ

السَّلامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللهِ وَبَرَكْاتُهُ

 

अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू

السَّـــــلاَمُ عَلَيــْــكُم ﻭَﺭَﺣﻤَــﺔ ﺍﻟﻠﻪِ ﻭ َﺑَـﺮَﻛـَﺎﺗــہ

Kya Hai ||What is Quran ? & History in Hindi||Quran Kaha se aya

अस्सलाम अलय्कुम  का मतलब

अस्सलाम या अस्सलाम अलय्कुम अरबी भाषा का एक अभिवादन है इसका मतलब आप पर सलामती हो “Peace be upon you” होता है यह मुस्लिमों का अभिवादन है जब भी मुसलमान आपस में मिलते हैं तो एक दूसरे को सलाम करते हैं यह इस्लामिक अभिवादन है अस्सलाम अलय्कुम का जवाब वालेकुम सलाम होता है इसका अर्थ “और आप पर भी सलामती हो” होता है

अस्सलाम अलैकुम के कई विभिन्न रूप हमें देखने को मिलते हैं मलेशिया, इंडोनेशिया, हिंदी, उर्दू आदि भाषाओं में सलाम के कई रुप हैं.

 

इस्लाम में अस सलाम का महत्व

इस्लाम में सलाम का बड़ा महत्व है जब भी मुसलमान कहीं आते हैं तो सलाम करते हैं और जाने पर भी सलाम किया जाता है एक हदीस जिसके रावी हज़रत अबू हुरैरा हैं कहते हैं कि मोहम्मद सल्लल्लाहो वाले वसल्लम ने फरमाया कि “जब तुम किसी महफिल में जाओ तो सलाम करो और जब तुम वहां से वापस आओ तो सलाम करो”

 

सलाम (अस्सलाम अलैकुम ) का पूरा रूप क्या है

सलाम या अस्सलाम वालेकुम का पूरा फॉर्म “अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाही व बराकातहू और मगफीरातु” है इसका अर्थ होता है कि “आप पर सलामती हो, और अल्लाह की रहमत हो, और बरकतें हो और अल्लाह आपकी मगफिरत फरमाए” यानी कि अल्लाह आपको माफ कर दे

 

एक और हदीस के मुताबिक मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से किसी ने पूछा कि किसे सलाम शुरू में करना चाहिए तो उन्होंने जवाब में कहा कि “जो व्यक्ति सवारी कर रहा है उसे पहले सलाम करना चाहिए जो कि पैदल चल रहा है और जो पैदल चल रहा है उसे पहले सलाम करना चाहिए उसे जो कि रास्ते पर खड़ा हुआ है छोटे से और लोगों के छोटे समूह अगर किसी बड़े समूह में जाएं तो उन्हें पहले सलाम करना चाहिए” (सहीह अल मुस्लिम 6234,  मुस्लिम 2160)

 

यह भी कहा गया है कि जब भी कोई घर में दाखिल हो तो उसे सलाम करना चाहिए कुरान की आयत पर आधारित है “जब भी तुम घरों में दाखिल हो तो सलाम करो” (सूरह अन नूर 24:61)

 

अस्सलाम वालेकुम का शॉर्ट रूट छोटा रूप A.S. हो गया है इंटरनेट यूजर्स और WhatsApp चैट मैसेज के दौरान केवल A.S. लिखकर ही सलाम किया जाता है ऐसी प्रथा बन गई है. इंटरनेट पर ईमेल या चैटिंग के दौरान भी पूरा सलाम ही किया जाना चाहिए ताकि अच्छी भावना बने और व्यक्ति को अल्लाह की रहमत मिले “अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाही व बराकातहू और मगफीरातु” ही पूरा सलाम हे.

 

कुरान ||होली कुरान ||meaning ||of Quran ||Quran in English

 

 सलाम की अहमियत और उसके आदाब

 

अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी
अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी

 

इस्लाम धर्म में सलाम करने को सन्नत तथा जवाब देने को वाजिब (जरूरी) करार दिया है। जैसे कोई मुसलमान सलाम करता है -अस्सलामोअलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकात। इसका मतलब है कि सलामती हो आप पर और अल्लाह की रहमत व बरकत भी। इसके जवाब में दूसरे मुसलमान को कहना होता है -वालेकुम अस्सलाम व रहमतुल्लाह व बरकात यानि आपको भी सलामती और अल्लाह की रहमत और बरकत मिले। जब हम किसी को सलाम करते हैं तो उसके कल्याण की कामना करते हैं। हम चाहते हैं कि उस पर अल्लाह की कृपा हो। जो हमारे बारे में ऐसा चाहता है

 

उसकी हम अनदेखी नहीं कर सकते। हमारा फर्ज होता है कि हम उसके कल्याण के बारे में भी ऐसा ही सोचें। ऊपर वाले से उसकी खुशी से हम भी दुआ करें। इस्लाम धर्म की पवित्र किताबों कुरान शरीफ व हदीस (मोहम्मद साहब की उक्ति) में साफ तौर पर लिखा है कि इंसानों को अल्लाह ने एक ही मां-बाप (आदम-हौआ) से पैदा किया , यानि सभी मनुष्य आदम और हौआ की संतान हैं। इस तथ्य पर जोर देने की वजह यह है कि इंसान इस बात को समझे कि इस तरह हम सब आपस में भाई हैं तथा सभी को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। खासकर पड़ोसियों से प्रेम भाव रखना हर इंसान का धार्मिक और सामाजिक कर्तव्य (फर्ज) है। हदीस में एक उल्लेख आया है कि पड़ोसी के घर अगर खाना न बने तो तुम्हारा खाना बनाना व खाना दोनों हराम (वो चीज जिसे धर्म और मन बुरा कहे) है। इस्लाम एकता व एकरूपता पर विशेष बल देता है।

 

एक हदीस के मुताबिक किसी भी रिश्तेदार या समाज के सदस्य से गुस्से की वजह से तीन दिन से ज्यादा समय तक सलाम-कलाम (बातचीत) बंद रखने या त्यागने को सख्त मना किया गया है। छोटे-बड़ों को बड़े छोटों को , औरत-मर्द को और मर्द-औरत को इनमें से कोई भी दूसरे को पहले सलाम कर सकता है। ऐसी बात नहीं कि छोटे ही बड़ों को सलाम करें या औरत ही मर्द को पहले सलाम करें। बल्कि मजहब के मुताबिक तो पहले सलाम करनेवाले को दस नेकियां ज्यादा मिलती हैं। बुलंद आवाज में सलाम करने को प्राथमिकता दी गयी है तथा साथ ही मुसाफा (हाथ मिलाकर बाईं ओर सीने पर हाथ रखना) को भी श्रेयष्कर माना गया है। मान्यता यह है कि सलाम तथा मुसाफा करने से इंसान का एक दूसरे के प्रति प्रेम और आकर्षण बढ़ता है। इंसानी मोहब्बत बढ़ेगी तभी सामाजिक बुराइयों का ह्रास होगा। इस्लाम धर्म के सलाम करने के तरीके व भारतीय संस्कृति को मिलाकर देखें तो पाएंगे कि हिन्दुस्तानी मुसलमानों में भारतीय संस्कृति का बहुत गहरा असर है। जैसे इस्लाम कहता है कि कोई भी किसी को भी सलाम कर सकता है। इस पर कहीं कोई पाबंदी या बंदिश नहीं है। लेकिन यहां के मुसलमानों में अक्सर छोटे ही बड़ों को तथा पत्नि ही पति को सलाम करती है।

 

 

Muslim personal law board kya hai

कहीं-कहीं हिन्दुस्तानी मुसलमानों में आदाब करने का भी प्रचलन है। आदाब का मतलब होता है ऐहतेराम , इज्जत , तमीज , अंदाज। वास्तव में ‘ आदाब अर्ज ‘ करने की शुरुआत लखनऊ से हुई है जिसे हम लखनवी अंदाज कहते हैं। जब औरंगजेब की मृत्यु 1707 ई. में हुई , उसके बाद मुगलिया सल्तनत की दीवारें हिल चुकी थीं तथा सभी रियासतों में विद्रोह के बोल फूट पड़े थे। उसी वक्त तकरीबन 1724-25 के आस-पास लखनऊ में अपनी पहचान और संस्कृति को लेकर काफी बहस चली तथा यह तय हुआ कि अब हम (लखनवी) दिल्ली से अलग पहचान बनाएंगे। तभी से सलाम करने के तरीके में भी बदलाव आया और सलाम करने की जगह आदाब अर्ज करने की शुरुआत हुई , जबकि कुरान व हदीस में आदाब अर्ज का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन आदाब अर्ज ने हमारी बहु सांस्कृतिक विरासत को बुलंदियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की। इस प्रकार हम देखते हैं कि सलाम करना न सिर्फ धामिर्क कार्य है , बल्कि हमारे सामाजिक सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है। जिसे अलग कर न हम धार्मिक मूल्य को पहचान पाएंगे और न ही सांस्कृतिक मूल्य को , बल्कि हम हर जगह ठगे रह जाएंगे। सलाम को अगर धार्मिक अभिवादन न मानकर यदि इसे अपनी अच्छी भावनाओं के प्रदर्शन का सामाजिक तरीका मानें तो वह कहीं सुंदर होगा।

 

 

Meaning of अस्सलाम अलैकुम in English

Peace be with you

Good morning to you

Peace be with you

”सलाम” के अल्फाज और उसका अज्र व सवाब:

-अफजल तरीका यह है कि मुलाकात के वक्त पूरा सलाम ”अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाहे व बरकातहू” कहा जाए। अगरचे सिर्फ अस्सलाम अलैकुम कह देने से भी सलाम करने की सुन्नत अदा हो जाएगी लेकिन तीन जुमले बोलने में ज्यादा अज्र व सवाब है।

 

जैसा कि हजरत इमरान बिन हसीन (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल0) एक बार मजलिस में तशरीफ फरमा थे कि एक शख्स नबी करीम (सल0) की खिदमत में हाजिर हुआ और उसने कहा -”अस्सलाम अलैकुम”। आप (सल0) ने उसके सलाम का जवाब दिया फिर वह मजलिस में बैठ गया तो आप (सल0) ने इरशाद फरमाया -” दस” (यानी इस बंदे के लिए उसके सलाम की वजह से दस नेकियां लिखी गईं) फिर एक और आदमी आया। उसने कहा-”अस्सलाम अलैकुम वरहमतुल्लाह”। आप (सल0) ने उसके सलाम का जवाब दिया फिर वह आदमी बैठ गया तो आप (सल0) ने इरशाद फरमाया -”बीस” (यानी उसके लिए बीस नेकियां लिखी गईं) फिर एक तीसरा आदमी आया। उसने कहा -”अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू।” आप (सल0) ने उसके सलाम का जवाब दिया। वह मजलिस में बैठ गया तो आप (सल0) ने फरमाया -”तीस” (यानी उसके लिए तीस नेकियां साबित होंगी)। (अबू दाऊद शरीफ, तिरमिजी शरीफ)

 

अल्लाह तआला का यह करीमाना कानून है कि उसने एक नेकी का अज्र इस आखिरी उम्मत के लिए दस नेकियों के बराबर मुकर्रर किया है। कुरआन मजीद में भी फरमाया गया -”जो शख्स नेक काम करेगा उसको कम से कम उसके दस हिस्से मिलेंगे यानी ऐसा समझा जाएगा गोया वह नेकी दस बार की और एक-एक नेकी पर जिस कद्र सवाब मिलता अब दस हिस्सा वैसे सवाब के मिलेंगे।

 

वाजेह रहे कि ”सलाम” का जवाब देने वाला भी इसी हिसाब से अज्र व सवाब का मुस्तहक होगा यानी ”वअलैकुम अस्सलाम” कहने पर दस नेकियां और ”वरहमतुल्लाह” के इजाफे पर बीस नेकियां और ”बरकातहू” के इजाफे पर तीस नेकियां मिलेगी।
इस हदीस शरीफ से सलाम के अल्फाज भी मालूम हो गए कि किन अल्फाज से सलाम करना चाहिए अल्फाज को बिगाड़ कर सलाम नहीं करना चाहिए। कुछ लोग इस तरह सलाम करते हैं कि जिसकी वजह से समझ में नहीं आता कि क्या अल्फाज कहे। इसलिए पूरी तरह वाजेह करके सलाम के अल्फाज बोलने चाहिए।

 

इमाम नूदी (रह0) ने फरमाया है कि अफजल तरीका यह है कि जमा के सेगे के साथ इस तरह सलाम किया जाए – अस्सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू” चाहे मुखातिब एक ही हो और जवाब देने वाला इन अल्फाज से जवाब दे – वअलैकुम अस्सलाम वरहमतुल्लाह व बरकातहू” यानी शुरू में वाव इतफ भी लाए और सलाम से कम से कम अल्फाज ”अस्सलाम अलैकुम” है और अगर कोई शख्स ”अस्सलाम अलैकुम” या सलाम अलैक कह दिया तो भी सुन्नत अदा हो जाती है। और जवाब के कम से कम अल्फाज ”वअलैकुम अस्सलाम” या ”वअलैक अस्सलाम” है और बगैर वाव के ”अलैकुम अस्सलाम” कहना भी दुरूस्त

 

अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी
अस्सलामु अलैकुम इन हिंदी

What is Hindi definition or meaning of सलाम ? (Salam ka hindi arth, matlab kya hai?).

1. एक पद जिसका अर्थ है- तुम सलामत रहो; तुम पर सलामती हो

2. मुसलमानों द्वारा एक-दूसरे को कियाजाने वाला अभिवादन; नमस्कार।

सलामत मतलब

– 1. विपदा या हानि से बचा हुआ सुरक्षित; महफ़ूज 2. सकुशल 3. जीवित; स्वस्थ 4. पूर्ण; पूरा; अखंड। कुशलतापूर्वक, जैसे- सलामत रहो।

सलामती मतलबŕ
[सं-स्त्री.] – 1. सलामत होने की अवस्था या भाव 2. रक्षा 3. स्वास्थ्य; तंदुरुस्ती 4. कुशल; क्षेम।

सलामी मतलब

[सं-स्त्री.] – 1. सलाम करने की क्रिया या भाव

2. सैनिकों या सिपाहियों द्वारा किसी प्रतिष्ठित अतिथि के आगमन पर एक साथ अभिवादन करना

3. किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के सम्मान में या किसी अतिथि के आगमन पर उसके सम्मानार्थ बंदूकों, तोपों आदि का दागा जाना

4. मकान या दुकान आदि किराए पर देते समय पगड़ी के रूप में लिया जाने वाला धन। [वि.] 1. झुकने वाला; ढालुआँ 2. {ला-अ.} प्रारंभिक; शुरुआती।

अस्सलाम मतलब

[सं-पु.] – ख़ुदा आपको सलामत रखे- ऐसी दुआ; सलाम; नमस्कार; बंदगी।

इसलामी मतलब

[वि.] – 1. इसलाम संबंधी; इसलाम का

2. इसलाम धर्म में होने वाला।

दुआ सलाम मतलब

[सं-पु.] – 1. हालचाल की जानकारी 2. अभिवादन 3. अल्पपरिचय वाला संबंध।

सलाम की परिभाषा

1-क्रिया
When someone salaams, they bow with their right hand on their forehead. This is used as a formal and respectful way of greeting someone in India and Muslim countries.

2 संकुचन
Some Muslims greet people by saying
Assalamu Alaikum

संज्ञा

-1-A greeting (lit., “peace”) used among Muslims

in full  Assalamu Alaikum,peace (be) to you” (Ar salām ʿalaykum)

-2-in the Near East, India, etc., a greeting or ceremonialcompliment, made by bowing low with the palm of the right hand placed on the foreh

3-an obeisance or respectful greeting
सकर्मक क्रिया

-4-to greet with a salaamअकर्मक क्रिया

-5-to make a salaam

salaam के शब्द मूल

Ar salām, health, peace; akin to Heb shalom, peace

 

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