आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान, 23 अक्टूबर को परचम कुशाई|| उर्स का पूरा टाइम टेबल

736
आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान, 23 अक्टूबर को परचम कुशाई|| उर्स का पूरा टाइम टेबल
आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान, 23 अक्टूबर को परचम कुशाई|| उर्स का पूरा टाइम टेबल

आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान, 23 अक्टूबर को परचम कुशाई|| उर्स का पूरा टाइम टेबल

 

 

आला हजरत उर्स का हुआ ऐला0न परचम कुशाई की रस्म 23 अक्टूबर को होगी। पोस्टर हुआ जारी परचम जुलूस आजम नगर से उठेगा और इस्लामियां मैदान तक जाएगा।

 

 

आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान, 23 अक्टूबर को परचम कुशाई|| उर्स का पूरा टाइम टेबल

 

"<yoastmark

 

 

आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान

 

आला हजरत – इस नाम से तमाम दुनिया वाकिफ है यह नाम इतना मुबारक है कि जबान पर आते ही दिल को सुकून और करार मिलता है आला हजरत एक ऐसी शख्सियत है जिनको तमाम दुनिया के लोग जानते हैं मानते हैं और उनकी मजार पर आकर feaz और बरकात उठाते हैं इस साल आला हजरत का 101 उर्स मनाया जाएगा इंशा अल्लाह.

 

100 Sala urs_e_AAla hazrat

 

आला हज़रत सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के सबसे बड़े धर्मगुरू इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी (आला हजरत) का 101 साला उर्स-ए-रजवी का आगाज होने जा रहा है। दरगाह आला हजरत की तरफ से उर्स का पोस्टर जारी किया गया है। परचम कुशाई की रस्म 23 अक्टूबर को होगी। परचम कुशाई की रस्म के बाद देश-विदेश से आने वाले उलेमा की तकरीर होगी। उर्स के तमाम प्रोग्राम दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां की अगुवाई में होगा। परचम कुशाई जुलूस सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की कयादत में निकलेगा।

 

 

हर साल होने वाले उर्से आला हजरत को लेकर दरगाह पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। तीन दिन होने वाले उर्स का आगाज 23 अक्टूबर को होगा। उर्स की रस्म अदायगी परचम कुशाई से होगी। परचम जुलूस आजम नगर से उठेगा और इस्लामियां मैदान तक जाएगा। परचम कुशाई की रस्म के साथ उर्स ए रजवी का आगाज हो जायेगा। रात को अंतरर्राष्ट्रीय मुुशायरा होगा। फिर हुज्जातुल इस्लाम के कुल की रस्म अदा की जाएगी। उलेमा की तकरीर प्रोग्राम भी रात भर चलेगा। मुफ्ती सलीम नूरी ने बताया कि उर्स को लेकर तमाम तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जुमे के दिन कुल की रस्म अदा की जाएगी।

 

 

अजहरी मियां का उर्स ||सुब्हानी मियां ने जताई नाराजगी

 

 

"<yoastmark

 

 

आला हजरत उर्स के कार्यक्रम का टाइम टेबल

23 अक्टूबर को उर्स-ए-परचम कुशाई की रस्म अदा की जाएगी। रात को हुज्जातुल अहमद रजा का कुल की रस्म अदा की जाएगी। रात भर मुशायरा प्रोग्राम होगा। 24 अक्टूबर को बाद नमाजे फज्र कुरआनख्वानी से होगी। नात ओ मनकवत व तकरीर उलेमा ए इकराम के बीच सुबह 9:58 बजे पर रेहाने मिल्लत का कुल के बाद तहफ्फुज मजहब और मसलक कॉन्फ्रेंस होगी।

 

"<yoastmark

 

रात बाद नमाजे ईशा (रात 9 बजे) दुनिया भर के उलेमा की तकरीर करेंगे। मुल्क की मशहूर खानकाहों से आये सज्जादगान व उलेमा मुसलमानों के दीनी व मिल्लती मसाइल पर चर्चा करेंगे। देर रात मुफ्ती ए आजम हिन्द के कुल की रस्म अदा होगी। 24 अक्टूबर की सुबह कुरआनख्वानी के बाद से उलेमा की तकरीर का सिलसिला शुरू होगा जो दोपहर तक जारी रहेगा। ठीक दोपहर को 2:38 बजे पर आला हजरत के 101 वें कुल के साथ तीन रोजा उर्स का समापन हो जाएगा।

 

Muslim personal law board kya hai

 

आला हजरत की जिंदगी

 

इमाम ए अहले सुन्नत अल – हाफिज, अल- कारी अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी का जन्म १० शव्वाल १६७२ हिजरी मुताबिक १४ जून १८५६ को बरेली में हुआ। आपके पूर्वज सईद उल्लाह खान कंधार के पठान थे जो मुग़लों के समय में हिंदुस्तान आये थें। इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेलवी के मानने वाले उन्हें आला हजरत के नाम से याद करते

 

 

"<yoastmark

 

 

आला हज़रत बहुत बड़े मुफ्ती

आला हज़रत बहुत बड़े मुफ्ती, आलिम, हाफिज़, लेखक, शायर, धर्मगुरु, भाषाविद, युगपरिवर्तक, तथा समाज सुधारक थे। जिन्हें उस समय के प्रसिद्ध अरब विद्वानों ने यह उपाधि दी। उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के दिलों में अल्लाह तआला व मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्रति प्रेम भर कर हज़रत मुहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नतों को जीवित कर के इस्लाम की सही रूह को पेश किया, आपके वालिद साहब ने 13 वर्ष की छोटी सी उम्र (आयु) में अहमद रज़ा को मुफ्ती घोषित कर दिया।

 

आला हजरत की जिंदगी के कुछ खास वाक्यात

 

"<yoastmark

 

 

उन्होंने 55 से अधिक विभिन्न विषयों पर 1000 से अधिक किताबें लिखीं जिन में तफ्सीर हदीस उनकी एक प्रमुख पुस्तक जिस का नाम “अद्दौलतुल मक्किया ” है जिस को उन्होंने केवल 8 घंटों में बिना किसी संदर्भ ग्रंथों के मदद से हरम शरीफ़ में लिखा। उनकी एक और प्रमुख किताब फतावा रजविया इस सदी के इस्लामी कानून का अच्छा उदाहरण है .

 

जो 13 विभागों में वितरित है। इमाम अहमद रज़ा खान ने कुरान ए करीम का उर्दू अनुवाद भी किया जिसे कंजुल ईमान नाम से जाना जाता है, आज उनका तर्जुमा इंग्लिश, हिंदी, तमिल, तेलुगू, फारसी, फ्रेंच, डच, स्पैनिश, अफ्रीकी भाषा में अनुवाद किया जा रहा है, आला हज़रत ने पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान को घटाने वालो को क़ुरआन और हदीस की मदद से मुंह तोड़ जवाब दिया!

 

आपके ही जरिए से मुफ्ती ए आज़म हिन्द मुस्तफा रज़ा खान, हुज्जतुल इस्लाम हामिद रज़ा खान, अख़्तर रज़ा खान अज़हरी मियाँ, जैसे बुजुर्ग इस दुनिया में आए, जिन्होंने इल्म की शमा को पूरी दुनिया में रोशन कर दिया,जब आला हजरत हज के लिए गए हुए थे तब उन्हें हुज़ूर का दीदार करने की तलब हुए तो उन्होंने इस तलब में एक शायर पढा “ऐ सूए न लाज़र फिरते है मेरे जैसे अनेक ओ कार फिरते है”

 

अगर आपको भाई यह पोस्ट आला हजरत उर्स का हुआ ऐलान, 23 अक्टूबर को परचम कुशाई|| उर्स का पूरा टाइम टेबल पसंद है तो प्लीज इसे सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें फेसबुक इंस्टाग्राम टि्वटर व्हाट्सएप सभी जगह पर शेयर करें थैंक यू वेरी मच दुआ में याद रखना नेक्स्ट पोस्ट में मिलते हैं इंशा अल्लाह हाफिज

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here